Wholesale Worth Primarily based Inflation Eases In September In opposition to August In accordance To Authorities Of Knowledge – आंकड़े: खुदरा महंगाई के बाद सितंबर में थोक मुद्रास्फीति दर में भी आई गिरावट, 10.66 फीसदी रहा Wpi

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सार

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2021 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 10.66 फीसदी रही।

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भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। अगस्त के 11.39 फीसदी के मुकाबले सितंबर में 10.66 फीसदी रही। इसमें गिरावट आई। जुलाई में यह 11.16 फीसदी, जून में यह 12.07 फीसदी और मई में यह 12.94 फीसदी थी। जबकि सितंबर 2020 में यह 1.32 फीसदी थी। डब्ल्यूपीआई सितंबर में लगातार छठे महीने दोहरे अंकों में रही। 

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सितंबर 2021 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से पिछले महीने की तुलना में खनिज तेलों, मूल धातुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायनों और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।

तेल और पावर की महंगाई दर 24.91 फीसदी बढ़ी। अगस्त में यह आंकड़ा 26.09 फीसदी था। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई सितंबर में 11.41 फीसदी रही, अगस्त में यह 11.39 फीसदी पर थी, जबकि जुलाई में यह 11.20 फीसदी थी। 

सितंबर महीने में घटी खुदरा महंगाई दर
मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई सितंबर महीने में घटकर 4.35 फीसदी हो गई। मुद्रास्फीति अगस्त में 5.30 फीसदी थी। दरअसल, खाद्य वस्तुओं के दाम कम होने के कारण ऐसा हुआ है। 

भारतीय रिजर्व बैंक के पास है इसकी जिम्मेदारी
भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर पर गौर करता है। सरकार ने रिजर्व बैंक को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को 4 फीसदी पर बरकरार रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।

औद्योगिक उत्पादन में 11.9 फीसदी की वृद्धि 
उधर, देश के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) में अगस्त में 11.9 फीसदी की वृद्धि हुई है। अगस्त, 2021 में विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन की वृद्धि दर 9.7 फीसदी रही। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खनन क्षेत्र का उत्पादन 23.6 फीसदी और बिजली क्षेत्र का 16 फीसदी बढ़ा।

विस्तार

भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। अगस्त के 11.39 फीसदी के मुकाबले सितंबर में 10.66 फीसदी रही। इसमें गिरावट आई। जुलाई में यह 11.16 फीसदी, जून में यह 12.07 फीसदी और मई में यह 12.94 फीसदी थी। जबकि सितंबर 2020 में यह 1.32 फीसदी थी। डब्ल्यूपीआई सितंबर में लगातार छठे महीने दोहरे अंकों में रही। 

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सितंबर 2021 में मुद्रास्फीति की उच्च दर मुख्य रूप से पिछले महीने की तुलना में खनिज तेलों, मूल धातुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायनों और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है।

तेल और पावर की महंगाई दर 24.91 फीसदी बढ़ी। अगस्त में यह आंकड़ा 26.09 फीसदी था। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई सितंबर में 11.41 फीसदी रही, अगस्त में यह 11.39 फीसदी पर थी, जबकि जुलाई में यह 11.20 फीसदी थी। 

सितंबर महीने में घटी खुदरा महंगाई दर

मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई सितंबर महीने में घटकर 4.35 फीसदी हो गई। मुद्रास्फीति अगस्त में 5.30 फीसदी थी। दरअसल, खाद्य वस्तुओं के दाम कम होने के कारण ऐसा हुआ है। 

भारतीय रिजर्व बैंक के पास है इसकी जिम्मेदारी

भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर पर गौर करता है। सरकार ने रिजर्व बैंक को दो फीसदी घट-बढ़ के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को 4 फीसदी पर बरकरार रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।

औद्योगिक उत्पादन में 11.9 फीसदी की वृद्धि 

उधर, देश के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) में अगस्त में 11.9 फीसदी की वृद्धि हुई है। अगस्त, 2021 में विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन की वृद्धि दर 9.7 फीसदी रही। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खनन क्षेत्र का उत्पादन 23.6 फीसदी और बिजली क्षेत्र का 16 फीसदी बढ़ा।

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