Supreme Courtroom Says Worker Hiding Prison Instances Is Not Entitled To The Proper Of Appointment – सुप्रीम कोर्ट: आपराधिक मामले छिपाने वाला कर्मचारी नियुक्ति के अधिकार का हकदार नहीं

[ad_1]

एजेंसी, नई दिल्ली।
Printed by: Jeet Kumar
Up to date Sat, 18 Sep 2021 03:07 AM IST

सार

राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 

ख़बर सुनें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक फैसले में कहा, अगर कोई कर्मचारी उसके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाता है या झूठा शपथपत्र देता है तो वह नियुक्ति के अधिकार का हकदार नहीं रहता।

राजस्थान हाईकोर्ट के 2019 के फैसले को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी दी। राजस्थान हाईकोर्ट ने नियुक्ति के दौरान लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने वाले एक कर्मचारी के बर्खास्तगी के आदेश को खारिज कर दिया था।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा, सवाल इस बात का नहीं है कि व्यक्ति अपराध में शामिल था या नहीं बल्कि यहां भरोसे का सवाल है।

आपराधिक मामले की जानकारी छिपाकर या झूठा शपथपत्र देकर उसने कंपनी का भरोसा तोड़ा है। यह विश्वसनीयता की बात है। जब शुरुआत में ही आवेदक इस तरह की धोखाधड़ी करता है तो नियोक्ता के मन में यह भ्रम हमेशा रहेगा कि भविष्य में इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ऐसे में कर्मचारी नियुक्ति का अपना अधिकार खो देता है और कंपनी उसे निकालने का फैसला ले सकती है।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक फैसले में कहा, अगर कोई कर्मचारी उसके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाता है या झूठा शपथपत्र देता है तो वह नियुक्ति के अधिकार का हकदार नहीं रहता।

राजस्थान हाईकोर्ट के 2019 के फैसले को खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी दी। राजस्थान हाईकोर्ट ने नियुक्ति के दौरान लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने वाले एक कर्मचारी के बर्खास्तगी के आदेश को खारिज कर दिया था।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा, सवाल इस बात का नहीं है कि व्यक्ति अपराध में शामिल था या नहीं बल्कि यहां भरोसे का सवाल है।

आपराधिक मामले की जानकारी छिपाकर या झूठा शपथपत्र देकर उसने कंपनी का भरोसा तोड़ा है। यह विश्वसनीयता की बात है। जब शुरुआत में ही आवेदक इस तरह की धोखाधड़ी करता है तो नियोक्ता के मन में यह भ्रम हमेशा रहेगा कि भविष्य में इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ऐसे में कर्मचारी नियुक्ति का अपना अधिकार खो देता है और कंपनी उसे निकालने का फैसला ले सकती है।

[ad_2]

Supply hyperlink

Share on:

नमस्कार दोस्तों, मैं Pinku, HindiMeJabab(हिन्दी में जवाब) का Technical Author & Co-Founder हूँ. Education की बात करूँ तो मैं 10th Pass हूँ. मुझे नयी नयी चीजों को सीखना और दूसरों को सिखाने में बड़ा मज़ा आता है. मेरी आपसे विनती है की आप लोग इसी तरह हमारा सहयोग देते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे.

Leave a Comment