Rajiv Gandhi Assassination: Convicted Nalini Sriharan, Who Is Serving A Life Sentence, Once more Approached The Madras Excessive Courtroom For Launch – राजीव गांधी हत्याकांड: आजीवन कारावास की सजा काट रही दोषी नलिनी ने फिर रिहाई के लिए मद्रास हाईकोर्ट का किया रुख

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एजेंसी, चेन्नई
Revealed by: Kuldeep Singh
Up to date Sat, 02 Oct 2021 03:28 AM IST

सार

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिल नाडु सरकार को दशहरा की छुट्टियों के बाद जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। नलिनी के वकील ने तर्क दिया कि राज्यपाल राज्य मंत्रिमंडल के निर्देश के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य हैं न कि इसके विपरीत।
 

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही नलिनी श्रीहरन ने एक बार फिर रिहाई के लिए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने कोर्ट से अपील की कि पूर्व पीएम की हत्या मामले में सभी सात जीवित दोषियों के पक्ष में प्रदेश कैबिनेट द्वारा की गई सिफारिश पर कार्रवाई न करने के लिए राज्यपाल के कदम को ‘असांविधानिक’ विफलता करार दिया जाए और बिना राज्यपाल की मंजूरी के उसकी रिहाई का आदेश दिया जाए। 

राज्यपाल की मंजूरी के बिना रिहा किए जाने की मांग की
चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस पीडी आदिकेस्वलु ने प्रदेश सरकार को दशहरा की छुट्टियों के बाद जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। नलिनी के वकील ने तर्क दिया कि राज्यपाल राज्य मंत्रिमंडल के निर्देश के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य हैं न कि इसके विपरीत।

प्रदेश की तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार ने 9 सितंबर 2018 को तत्कालीन राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से सभी सात दोषियों मुरुगन, सांथन, एजी पेरारिवलन, रविचंद्रन, जयाकुमार, रॉबर्ट पयास और नलिनी को रिहा करने की सिफारिश की थी। नलिनी इससे पहले भी रिहाई के लिए हाईकोर्ट से अपील कर चुकी हैं।

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही नलिनी श्रीहरन ने एक बार फिर रिहाई के लिए मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने कोर्ट से अपील की कि पूर्व पीएम की हत्या मामले में सभी सात जीवित दोषियों के पक्ष में प्रदेश कैबिनेट द्वारा की गई सिफारिश पर कार्रवाई न करने के लिए राज्यपाल के कदम को ‘असांविधानिक’ विफलता करार दिया जाए और बिना राज्यपाल की मंजूरी के उसकी रिहाई का आदेश दिया जाए। 

राज्यपाल की मंजूरी के बिना रिहा किए जाने की मांग की

चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस पीडी आदिकेस्वलु ने प्रदेश सरकार को दशहरा की छुट्टियों के बाद जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। नलिनी के वकील ने तर्क दिया कि राज्यपाल राज्य मंत्रिमंडल के निर्देश के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य हैं न कि इसके विपरीत।

प्रदेश की तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार ने 9 सितंबर 2018 को तत्कालीन राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से सभी सात दोषियों मुरुगन, सांथन, एजी पेरारिवलन, रविचंद्रन, जयाकुमार, रॉबर्ट पयास और नलिनी को रिहा करने की सिफारिश की थी। नलिनी इससे पहले भी रिहाई के लिए हाईकोर्ट से अपील कर चुकी हैं।

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