Punjab Chief Minister Charanjit Channi Meet Governor In Raj Bhavan New Cupboard Of Punjab – पंजाब की नई कैबिनेट का एलान: कैप्टन के पांच सहयोगियों की छुट्टी, सात नए चेहरे शामिल, कल लेंगे शपथ

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Printed by: निवेदिता वर्मा
Up to date Sat, 25 Sep 2021 12:01 PM IST

सार

कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में नई कैबिनेट के गठन को लेकर मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी को आगे रखकर ही फैसला लिया। चन्नी को अपनी टीम बनाने की पूरी छूट दी गई है। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू इस कवायद से दूर हैं।

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पंजाब की नई कैबिनेट तय हो गई है। राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित रविवार शाम साढ़े चार बजे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली नई कैबिनेट के मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे। शनिवार दोपहर राज्यपाल से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने मंत्रियों की शपथ ग्रहण के लिए राज्यपाल से समय मांगा था। राज्यपाल की तरफ से रविवार शाम 4:30 बजे का समय तय किया गया है।

यह भी पढ़ें – पंजाब की नई सरकार में भी खटपट: अब डिप्टी सीएम ओपी सोनी की चाहतें बढ़ीं, मांगी मुख्यमंत्री के समान सुविधाएं 

सात नए चेहरे शामिल
इस बीच नए मंत्रिमंडल में शामिल चेहरों को लेकर सोशल मीडिया पर अनुमान लगाए जाने लगे हैं वहीं दूसरी ओर शुक्रवार रात दस बजे नई दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर मुख्यमंत्री चन्नी, पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू, उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और गोपी सोनी की मौजूदगी में मंत्रिमंडल को अंतिम रूप दिया गया। माना जा रहा है कि नए मंत्रिमंडल में पांच पूर्व मंत्रियों को जगह नहीं दी गई है जबकि 7 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इनमें परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और संगत सिंह गिलजियां के नाम प्रमुख हैं। 

कांग्रेस नेतृत्व चन्नी को आगे कर चुन रहा है नई टीम

कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में नई कैबिनेट के गठन को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को आगे रखकर ही फैसला लिया है। चन्नी को अपनी टीम बनाने की पूरी छूट दी गई थी। कांग्रेस नेतृत्व ने चन्नी मंत्रिमंडल के लिए मंत्रियों के नाम थोपने के बजाय उन्हीं के सुझाए नामों को लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं से विचार विमर्श किया। पंजाब से जुड़े कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं के सुझाव भी चयन प्रक्रिया के लिए अहम माने जा रहे हैं।

कैप्टन मंत्रिमंडल में शामिल नामों की समीक्षा
कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी की गई और उन्हीं नामों पर पुनर्विचार किया गया जिनके साथ काम करने में चन्नी सहज होंगे। नेतृत्व कुछ नए चेहरे भी शामिल करना चाहता था, जो किसी गुट विशेष या विवादों से दूर थे। नेतृत्व का फोकस मंत्रिमंडल का ऐसा चेहरा सामने रखने का है, जिन्हें चुनाव में आगे रखकर चला जा सके।  

विस्तार

पंजाब की नई कैबिनेट तय हो गई है। राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित रविवार शाम साढ़े चार बजे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली नई कैबिनेट के मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे। शनिवार दोपहर राज्यपाल से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने मंत्रियों की शपथ ग्रहण के लिए राज्यपाल से समय मांगा था। राज्यपाल की तरफ से रविवार शाम 4:30 बजे का समय तय किया गया है।

यह भी पढ़ें – पंजाब की नई सरकार में भी खटपट: अब डिप्टी सीएम ओपी सोनी की चाहतें बढ़ीं, मांगी मुख्यमंत्री के समान सुविधाएं 

सात नए चेहरे शामिल

इस बीच नए मंत्रिमंडल में शामिल चेहरों को लेकर सोशल मीडिया पर अनुमान लगाए जाने लगे हैं वहीं दूसरी ओर शुक्रवार रात दस बजे नई दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर मुख्यमंत्री चन्नी, पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू, उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और गोपी सोनी की मौजूदगी में मंत्रिमंडल को अंतिम रूप दिया गया। माना जा रहा है कि नए मंत्रिमंडल में पांच पूर्व मंत्रियों को जगह नहीं दी गई है जबकि 7 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इनमें परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और संगत सिंह गिलजियां के नाम प्रमुख हैं। 

कांग्रेस नेतृत्व चन्नी को आगे कर चुन रहा है नई टीम

कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में नई कैबिनेट के गठन को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को आगे रखकर ही फैसला लिया है। चन्नी को अपनी टीम बनाने की पूरी छूट दी गई थी। कांग्रेस नेतृत्व ने चन्नी मंत्रिमंडल के लिए मंत्रियों के नाम थोपने के बजाय उन्हीं के सुझाए नामों को लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं से विचार विमर्श किया। पंजाब से जुड़े कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं के सुझाव भी चयन प्रक्रिया के लिए अहम माने जा रहे हैं।

कैप्टन मंत्रिमंडल में शामिल नामों की समीक्षा

कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी की गई और उन्हीं नामों पर पुनर्विचार किया गया जिनके साथ काम करने में चन्नी सहज होंगे। नेतृत्व कुछ नए चेहरे भी शामिल करना चाहता था, जो किसी गुट विशेष या विवादों से दूर थे। नेतृत्व का फोकस मंत्रिमंडल का ऐसा चेहरा सामने रखने का है, जिन्हें चुनाव में आगे रखकर चला जा सके।  

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