Mahant Narendra Giri Loss of life Case: Bairagi Saints Might Not Be a part of Assembly For Akhara Parishad New President Appointment – नरेंद्र गिरि केस: क्या नए अध्यक्ष के चयन में शामिल नहीं होंगे बैरागी, कुंभ में तीनों अखाड़ों ने परिषद से तोड़ दिया था नाता

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सार

Mahant Narendra Giri Loss of life Case: तीनों बैरागी अखाड़ों ने हरिद्वार कुंभ में अखाड़ा परिषद से खुद को अलग कर लिया था। ऐसे में शैव-संन्यासी और वैष्णव संप्रदाय के संतों के बीच दूरियां बनी हैं।

महाकुंभ में बैरागी अखाड़ों के संत
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने के बाद अब सबकी निगाहें परिषद के नए अध्यक्ष की ताजपोशी पर होगी। 2024 में प्रयाग में होने वाले कुंभ की तैयारियां शुरू होने लगी हैं। इस लिहाज से भी परिषद अध्यक्ष की कुर्सी अधिक समय तक रिक्त नहीं छोड़ी जाएगी। नए अध्यक्ष चयन के लिए बैरागी संतों के शामिल होने को लेकर अभी असमंजस बरकरार है। तीनों बैरागी अखाड़ों ने हरिद्वार कुंभ में अखाड़ा परिषद से खुद को अलग कर लिया था। ऐसे में शैव-संन्यासी और वैष्णव संप्रदाय के संतों के बीच दूरियां बनी हैं। परिषद महामंत्री से लेकर बैरागी अखाड़ों के मुखिया नए अध्यक्ष के चयन में बैरागियों की सहभागिता को लेकर स्पष्ट नहीं हैं।

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पदाधिकारियों ही देखरेख में ही कुंभ का आयोजन होते हैं। परिषद के गठन से पूर्व तक कुंभ स्नान से लेकर पेशवाई निकाले जाने में शैव, संन्यासी और वैष्णवों के बीच संघर्ष होते थे। संतों के इसी खूनी संघर्ष को रोकने के लिए परिषद का गठन हुआ। परिषद में अध्यक्ष सर्वोच्च पद है। महामंत्री और उपाध्यक्ष इसके बाद हैं। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि सर्वमान्य संत थे, जिसके चलते लगातार दूसरी बार परिषद के अध्यक्ष बने। 20 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत से बाघंबरी की गद्दी से लेकर श्री निरंजनी अखाड़े में सचिव के अलावा सबसे अहम परिषद अध्यक्ष पद खाली हो गया। 

नए अध्यक्ष की ताजपोशी तक उपाध्यक्ष दायित्व संभालेंगे। लेकिन जल्द ही नए अध्यक्ष का चयन होगा। अध्यक्ष चयन में अभी तक सभी 13 अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि शामिल होते हैं। सामूहिक निर्णय के आधार पर अध्यक्ष चुना जाता है। लेकिन तीन बैरागी अखाड़ों के परिषद से अलग होने से नए अध्यक्ष के चयन को लेकर कई अटकलें लगने लगी हैं।

– जूना के तीन अखाड़े (अग्नि, आह्वान और जूना)
– श्री निरंजनी के दो अखाड़े (आनंद और निरंजनी)
– महा निर्वाणी के दो अखाड़े (अटल और निर्वाणी)
– बड़ा अखाड़ा
– नया अखाड़ा
– निर्मल अखाड़ा

बैरागी वैष्णव संप्रदाय के तीन अखाड़े
– श्री दिगंबर अणि अखाड़ा
– श्री निर्वाणी अणि अखाड़ा
– श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़ा

ऐसी कोई परंपरा नहीं कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की कुर्सी खाली होने तक तत्काल उसमें ताजपोशी की जाए। जहां तक परिषद के नए अध्यक्ष के चयन का सवाल है, अखाड़ों के संतों से वार्ता और सभी को विश्वास में लेकर फैसला होगा। अध्यक्ष चयन में बैरागी अखाड़ों के संतों की भागीदारी के मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इस मामले पर भी संत ही सामूहिक फैसला करेंगे। 
– श्रीमहंत हरिगिरि, अखाड़ा परिषद महामंत्री

अभी इस मामले पर कोई टिप्पणी न किया जाए तो अच्छा है। कुछ देर बाद इस मामले में बात करेंगे। 
– राजेंद्र दास, अध्यक्ष श्री निर्वाणी अखाड़ा 

सभी 13 अखाड़े परिषद के अध्यक्ष का चयन करते हैं। प्रयागराज कुंभ 2024 में होना है। इसलिए जल्दबाजी ठीक नहीं है। वैसे भी हरिद्वार कुंभ के दौरान बैरागियों के अखाड़ों के अलग होने के बाद अखाड़ा परिषद रहा कहां। 
– रामकिशोर दास, अध्यक्ष श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़ा

विस्तार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने के बाद अब सबकी निगाहें परिषद के नए अध्यक्ष की ताजपोशी पर होगी। 2024 में प्रयाग में होने वाले कुंभ की तैयारियां शुरू होने लगी हैं। इस लिहाज से भी परिषद अध्यक्ष की कुर्सी अधिक समय तक रिक्त नहीं छोड़ी जाएगी। नए अध्यक्ष चयन के लिए बैरागी संतों के शामिल होने को लेकर अभी असमंजस बरकरार है। तीनों बैरागी अखाड़ों ने हरिद्वार कुंभ में अखाड़ा परिषद से खुद को अलग कर लिया था। ऐसे में शैव-संन्यासी और वैष्णव संप्रदाय के संतों के बीच दूरियां बनी हैं। परिषद महामंत्री से लेकर बैरागी अखाड़ों के मुखिया नए अध्यक्ष के चयन में बैरागियों की सहभागिता को लेकर स्पष्ट नहीं हैं।

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद पदाधिकारियों ही देखरेख में ही कुंभ का आयोजन होते हैं। परिषद के गठन से पूर्व तक कुंभ स्नान से लेकर पेशवाई निकाले जाने में शैव, संन्यासी और वैष्णवों के बीच संघर्ष होते थे। संतों के इसी खूनी संघर्ष को रोकने के लिए परिषद का गठन हुआ। परिषद में अध्यक्ष सर्वोच्च पद है। महामंत्री और उपाध्यक्ष इसके बाद हैं। श्रीमहंत नरेंद्र गिरि सर्वमान्य संत थे, जिसके चलते लगातार दूसरी बार परिषद के अध्यक्ष बने। 20 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत से बाघंबरी की गद्दी से लेकर श्री निरंजनी अखाड़े में सचिव के अलावा सबसे अहम परिषद अध्यक्ष पद खाली हो गया। 

नए अध्यक्ष की ताजपोशी तक उपाध्यक्ष दायित्व संभालेंगे। लेकिन जल्द ही नए अध्यक्ष का चयन होगा। अध्यक्ष चयन में अभी तक सभी 13 अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि शामिल होते हैं। सामूहिक निर्णय के आधार पर अध्यक्ष चुना जाता है। लेकिन तीन बैरागी अखाड़ों के परिषद से अलग होने से नए अध्यक्ष के चयन को लेकर कई अटकलें लगने लगी हैं।


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