From Earth To Universe: Web Will Attain Each Village In The Nation, A New World Of Excessive Pace Web Will Be Prepared – इंडिया ‘इन-स्पेस’: देश के हर गांव में पहुंचेगा इंटरनेट, तैयार होगी हाई स्पीड इंटरनेट की नई दुनिया

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सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष संघ को भूमंडल से ब्रह्मांड तक देशवासियों की प्रगति का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र 130 करोड़ देशवासियों के प्रगति का माध्यम है। हमारे लिए स्पेस सेक्टर यानी बेहतर मैपिंग, इमेजिंग और संचार की सुविधा है। उद्यमियों के लिए शिपमेंट से डिलीवरी तक बेहतर गति है और किसानों के लिए मौसम की बेहतर भविष्यवाणी है।

कुछ इस तरह काम करेगी इंडियन स्पेस एसोसिएशन।
– फोटो : Amar Ujala

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इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) की लॉन्चिंग के साथ ही भारत में अमेरिका की तर्ज पर वैश्विक और घरेलू स्तर की निजी क्षेत्र की स्पेस कंपनियां भारतीय अंतरिक्ष परिक्षेत्र से जुड़ेंगी। इसका सबसे अधिक लाभ अंतरिक्ष आधारित कम्युनिकेशन (दूरसंचार) नेटवर्क को बेहतर करने में होगा।

स्पेस सैटेलाइट कम्युनिकेशन से हाई स्पीड वाली इंटरनेट की नई दुनिया बनेगी। आईएसपीए इंडस्ट्री, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारती एयरटेल, वन वेब, टाटा ग्रुप की नेल्को, लॉसर्न एंड टूब्रो, मैप माई इंडिया समेत अन्य कंपनियों की भारतीय अंतरिक्ष की दुनिया में भागीदारी बढ़ेगी।

अंतरिक्ष आधारित दूरसंचार नेटवर्क का विकास…

  • अंतरिक्ष की दुनिया में निजी क्षेत्र की कंपनियां भी आगे आ रही हैं। भारत समेत कई विदेशी कंपनियां सैटेलाइट कम्युनिकेशन (उपग्रह दूरसंचार) को अंतरिक्ष की दुनिया की नई क्रांति मान रही है।
  • इसमें स्पेस-एक्स, स्टार लिंक, सुनील भारती मित्तल की कंपनी वन वेब, अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर, अमेरिकी सैटेलाइट निर्माता ह्यूजस कम्युनिकेशन इत्यादि शामिल हैं।

सैटेलाइट इंटरनेट क्यों जरूरी है?

  • सैटेलाइट इंटरनेट से पिछड़े या ग्रामीण क्षेत्रों को इस आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा सकेगा। खासकर ऐसे क्षेत्रों में या लोगों के पास इंटरनेट पहुंचेगा जहां इंटरनेट और नेटवर्क सिर्फ सपना है। दुनिया के हर इंसान के पास इंटरनेट होगा।

सैटेलाइट इंटरनेट का दायरा सीमित

  • सैटेलाइट इंटरनेट का दायरा आज के दौर में सीमित है। कुछ कॉरपोरेट घराने और बड़े संस्थान  आपातकाल स्थिति में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यह नई क्रांति है।
  • इंडियन नेशनल स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथराइजेशन (इन-स्पेस) का कहना है कि अभी हर साल 4-5 रॉकेट का प्रक्षेपण हो रहा है। आने वाले समय में इसे तीन गुना करने की तैयारी है।
     
  • अमेरिका में सैटेलाइट संचार का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 45 लाख है।
  • यूरोपीय संघ में ये आंकड़ा 21 लाख है।
  • भारत में उपग्रह संचार का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या सबसे कम महज तीन लाख है।
  • उम्मीद है कि आने वाले समय में ये आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा। भारत दुनिया के दूसरे देशों के बराबर होगा।

तैयारी…हाई स्पीड कनेक्टिविटी की

  • वन वेब अभी लो अर्थ ऑरबिट वाले 648 सैटेलाइट का तारामंडल बनाने की तैयारी में है। उसने 322 उपग्रह पहले ही ऑरबिट में छोड़ दिए हैं।
  • उम्मीद है इसकी सेवाएं आर्कटिक क्षेत्र के साथ अलास्का, कनाडा और ब्रिटेन में वर्ष 2022 के अंत तक मिलने लगेंगी।

भारत सरकार से इन कंपनियों की बात जारी…

  • स्टार लिंक और अमेजन की भी भारत सरकार से बात चल रही है।
  • स्पेस-एक्स की योजना है कि वो 12 हजार सैटेलाइट का नेटवर्क स्थापित करे। इसमें से वो 1300 सैटेलाइट को पहले ही अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि ‘इन-स्पेस’ अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों को बढ़ावा देने में मदद करेगा। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकार ने इंडियन नेशनल स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथराइजेशन (इन-स्पेस) का गठन किया है। यह अंतरिक्ष से संबंधित सभी कार्यक्रमों के लिए एकल-खिड़की स्वतंत्र एजेंसी के रूप में काम करेगा।

मोदी ने सरकार की ओर से किए जा रहे विभिन्न सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की भूमिका प्रवर्तक की होनी चाहिए, संचालक की नहीं। उन्होंने एअर इंडिया की बिक्री को एक निर्णायक सरकार की पहचान के तौर पर पेश करते हुए दावा किया कि देश में इस हद तक निर्णायक सरकार पहले कभी नहीं रही। पीएम ने नुकसान में चल रही एअर इंडिया का निजीकरण करने में सरकार की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उसकी प्रतिबद्धता और गंभीरता को दर्शाता है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खनन, कोयला, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्र निजी क्षेत्र के लिए खुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बारे में सरकार की नीति यह है कि जिन क्षेत्रों में उसकी आवश्यकता नहीं है, उन्हें निजी उपक्रमों के लिए खोला जाना चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में इतने बड़े स्तर पर सुधार दिख रहे हैं क्योंकि उसका दृष्टिकोण स्पष्ट है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने का है। भारत उन मुट्ठीभर देशों में शामिल है, जिनके पास अंतरिक्ष क्षेत्र में ‘एंड टू एंड’ (एक सिरे से दूसरे सिरे तक निर्बाध आपूर्ति वाली) प्रौद्योगिकी है। उन्होंने कहा कि सरकार साझेदार के रूप में उद्योगों, युवा नवोन्मेषकों और स्टार्ट-अप की मदद कर रही है और करती रहेगी।

  • निजी क्षेत्र को नवाचार की स्वतंत्रता देना।
  • सरकार की सामर्थ्य प्रदान करने की भूमिका निभाना।
  • युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना।
  • आम आदमी के विकास में सहायता प्रदान करना।
पीएम बोले, महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद  
अंतरराष्ट्रीय बलिका दिवस के मौके पर मोदी ने उम्मीद जताई कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार से इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस है और हम भारत के मंगल मिशन में महिला वैज्ञानिक की भूमिका को कैसे भुला सकते हैं।

भारतीय अंतरिक्ष संघ के सदस्य
लार्सन एंड टूब्रो, नेल्को (टाटा समूह), वन वेब, भारती एयरटेल, मैपमाइइंडिया, वालचांदनगर इंड्रस्ट्रीज और अनंत टेक्नोलॉजी लिमिटेड, गोदरेज, बीईएल सहित अन्य कंपनियां।

1. सैटेलाइट इंटरनेट को मिलेगी रफ्तार
दूरदराज, पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तक चंद सेकंड में मिलेगा तेज स्पीड इंटरनेट। इसके लिए स्पेस एक्स की स्टारलिंक, सुनील भारती मित्तल की वन बेव, अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
कैसे काम करेगा : जमीन पर ग्राउंड नोड्स और आसमान में सैटेलाइट, बस इन दो चीजों की ही जरूरत होगी। बाकी किसी बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं।

2. सिंगल विंडो एजेंसी
यह संघ स्टार्ट-अप और निजी कंपनियों के अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने के लिए स्वतंत्र और सिंगल विंडों एजेंसी की तरह काम करेगा।

3. देश में स्पेस हब और अंतरिक्ष क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाएगा।

4. बेहतर मैपिंग, उन्नत इमेजिंग और कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी।

5. अंतरिक्ष पर्यटन का रास्ता खुलेगा
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र के आने से अमेरिका के नासा की तर्ज पर भारत में इसरो के सहयोग से अंतरिक्ष पर्यटन शुरू करने का रास्ता खुल सकेगा।

आने वाले दिनों में उद्योग अंतरिक्ष कार्यक्रम के अगुआ होंगे। उद्योगों में उपग्रह और उपकरणों के निर्माण की क्षमता है। अब उन्हें लाॅन्च व्हीकल के निर्माण के बारे में भी विचार करना चाहिए। इन-स्पेस केंद्रीय नियामक निकाय होगा, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करेगा। इन-स्पेस अब इसरो की बजाय विक्रेता के तौर पर उद्योग से संपर्क करेगा। – के विजय राघवन, मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार, केंद्र सरकार

दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं बढ़ेंगी
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के मेल से देश के दूरदराज के क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और समावेशी विकास में मदद मिलेगी। सरकार इस क्षेत्र में सुधार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। – अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री

लोकतांत्रिक बनेगी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
सरकार आम आदमी के लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को ‘लोकतांत्रिक’ बनाने और इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को उदार बनाने की दिशा में भी ठोस प्रयास कर रही है। पिछले सात वर्षों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी हर भारतीय घर तक पहुंच गई है। – जितेंद्र सिंह, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सोमवार को भारत की व्यावसायिक स्वदेशी उपग्रह संचार समाधान, भौगोलिक क्षेत्रों में निगरानी क्षमताओं और अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, यह वक्त की जरूरत है। आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकी विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू हैं। ऐसे में सरकारें अब राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए नीतियां बनाने में एकमात्र हितधारक नहीं हो सकतीं। निजी क्षेत्र राष्ट्रनिर्माण में बराबरी का हिस्सेदार है।

सशस्त्र बलों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएं
सीडीएस बिपिन रावत ने कहा, निजी उद्योगों को सशस्त्र बलों की अभियान संबंधी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उत्पाद मुहैया कराने की दिशा में काम करना होगा। सशस्त्र बल इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि भारतीय उद्योग युद्ध जीतने की क्षमताओं के लिए उत्पाद और नवोन्मेषी तकनीकों के साथ अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां प्रदान करेंगे।

विस्तार

इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) की लॉन्चिंग के साथ ही भारत में अमेरिका की तर्ज पर वैश्विक और घरेलू स्तर की निजी क्षेत्र की स्पेस कंपनियां भारतीय अंतरिक्ष परिक्षेत्र से जुड़ेंगी। इसका सबसे अधिक लाभ अंतरिक्ष आधारित कम्युनिकेशन (दूरसंचार) नेटवर्क को बेहतर करने में होगा।

स्पेस सैटेलाइट कम्युनिकेशन से हाई स्पीड वाली इंटरनेट की नई दुनिया बनेगी। आईएसपीए इंडस्ट्री, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारती एयरटेल, वन वेब, टाटा ग्रुप की नेल्को, लॉसर्न एंड टूब्रो, मैप माई इंडिया समेत अन्य कंपनियों की भारतीय अंतरिक्ष की दुनिया में भागीदारी बढ़ेगी।

अंतरिक्ष आधारित दूरसंचार नेटवर्क का विकास…

  • अंतरिक्ष की दुनिया में निजी क्षेत्र की कंपनियां भी आगे आ रही हैं। भारत समेत कई विदेशी कंपनियां सैटेलाइट कम्युनिकेशन (उपग्रह दूरसंचार) को अंतरिक्ष की दुनिया की नई क्रांति मान रही है।
  • इसमें स्पेस-एक्स, स्टार लिंक, सुनील भारती मित्तल की कंपनी वन वेब, अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर, अमेरिकी सैटेलाइट निर्माता ह्यूजस कम्युनिकेशन इत्यादि शामिल हैं।

सैटेलाइट इंटरनेट क्यों जरूरी है?

  • सैटेलाइट इंटरनेट से पिछड़े या ग्रामीण क्षेत्रों को इस आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा सकेगा। खासकर ऐसे क्षेत्रों में या लोगों के पास इंटरनेट पहुंचेगा जहां इंटरनेट और नेटवर्क सिर्फ सपना है। दुनिया के हर इंसान के पास इंटरनेट होगा।

सैटेलाइट इंटरनेट का दायरा सीमित

  • सैटेलाइट इंटरनेट का दायरा आज के दौर में सीमित है। कुछ कॉरपोरेट घराने और बड़े संस्थान  आपातकाल स्थिति में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यह नई क्रांति है।
  • इंडियन नेशनल स्पेस प्रोमोशन एंड ऑथराइजेशन (इन-स्पेस) का कहना है कि अभी हर साल 4-5 रॉकेट का प्रक्षेपण हो रहा है। आने वाले समय में इसे तीन गुना करने की तैयारी है।

     

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नमस्कार दोस्तों, मैं Pinku, HindiMeJabab(हिन्दी में जवाब) का Technical Author & Co-Founder हूँ. Education की बात करूँ तो मैं 10th Pass हूँ. मुझे नयी नयी चीजों को सीखना और दूसरों को सिखाने में बड़ा मज़ा आता है. मेरी आपसे विनती है की आप लोग इसी तरह हमारा सहयोग देते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे.

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