Corona Third Wave 25 Mutations Discovered In Delta Variant Delta-4 Is Progressing Like Delta – तीसरी लहर का खतरा: कोरोना के डेल्टा वैरिएंट में अब तक मिले 25 म्यूटेशन, डेल्टा की तरह आगे बढ़ता जा रहा डेल्टा-4

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सार

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ही नहीं, अमेरिका, यूरोप सहित कई देशों में म्यूटेशन हो रहा है। इसकी वजह से वायरस में और अधिक बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में ही अब तक 25 बार डेल्टा वैरिएंट में म्यूटेशन हुआ है और उसके अलग-अलग मरीजों में पहचान हुई है। 

वैरिएंट से तीसरी लहर का खतरा (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : pixabay

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बायोटेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों की आशंका को देखते हुए भारत में डेल्टा-4 नामक कोरोना वैरिएंट से तीसरी लहर का खतरा बढ़ गया है। दरअसल डेल्टा-4 वैरिएंट तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों की टीम ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। उन्होंने केंद्र सरकार को 13 सितंबर को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसके मुताबिक दूसरी लहर के बाद से देश में डेल्टा वैरिएंट में लगातार म्यूटेशन हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ही नहीं, अमेरिका, यूरोप सहित कई देशों में म्यूटेशन हो रहा है। इसकी वजह से वायरस में और अधिक बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में ही अब तक 25 बार डेल्टा वैरिएंट में म्यूटेशन हुआ है और उसके अलग-अलग मरीजों में पहचान हुई है। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक 90,115 सैंपल का जीनोम अनुक्रम पूरा हुआ है, जिनमें 62.9 फीसदी सैंपल में वायरस के गंभीर वैरिएंट मिले हैं। इनमें डेल्टा, अल्फा, गामा, बीटा, कप्पा इत्यादि वैरिएंट हैं, जो न सिर्फ दोबारा संक्रमण होने की आशंका को बढ़ा देते हैं, बल्कि वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमित कर सकते हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत में म्यू या फिर सी.1.2 नामक वैरिएंट का कोई मामला अब तक नहीं मिला है, लेकिन डेल्टा और डेल्टा से जुड़े अन्य म्यूटेशन लगातार हो रहे हैं, जिस कारण देश में महामारी की नई चिंताजनक स्थिति सामने आ सकती है। वर्तमान में डेल्टा-4 (एवाई.4) अधिकांश सैंपल में मिल रहा है। 

डेल्टा-1 से 25 तक  में चार सबसे तेज
सभी म्यूटेशन को डेल्टा-1 से लेकर डेल्टा-25 तक गणितीय पहचान दी गई है। इन 25 में से डेल्टा-4 नामक म्यूटेशन काफी तेज लग रहा है। महाराष्ट्र और केरल में अभी यही म्यूटेशन फैल रहा है। आशंका है कि कोरोना की आगामी लहर में डेल्टा में हो रहे इन म्यूटेशन की बड़ी और गंभीर भूमिका हो सकती है।

डब्ल्यूएचओ ने चिंताजनक श्रेणी में रखा
दिल्ली स्थित आईजीआईबी के अनुसार पिछले महीने महाराष्ट्र में 44 फीसदी मरीजों में डेल्टा-4 वैरिएंट मिला था। जबकि केरल में यह संख्या 30 फीसदी से भी अधिक है। वर्तमान में डेल्टा-4 वैरिएंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंताजनक श्रेणी में रखा हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के इन नए म्यूटेशन की वजह से महामारी की नई लहर में स्थिति कुछ भी पैदा हो सकती है।

देशभर में कोरोना को काबू में करने के जारी टीकाकरण अभियान के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 रोधी टीकों की अब तक 78.58 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, 1.16 करोड़ से अधिक खुराक जल्द भेजने की तैयारी है। मंत्रालय ने कहा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी 5.16 करोड़ खुराक उपलब्ध हैं। इसके साथ ही टीका आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को ज्यादा टीके उपलब्ध कराकर तथा बेहतर योजना बनाकर टीकाकरण अभियान को मजबूत किया गया है।

विस्तार

बायोटेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों की आशंका को देखते हुए भारत में डेल्टा-4 नामक कोरोना वैरिएंट से तीसरी लहर का खतरा बढ़ गया है। दरअसल डेल्टा-4 वैरिएंट तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों की टीम ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। उन्होंने केंद्र सरकार को 13 सितंबर को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसके मुताबिक दूसरी लहर के बाद से देश में डेल्टा वैरिएंट में लगातार म्यूटेशन हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ही नहीं, अमेरिका, यूरोप सहित कई देशों में म्यूटेशन हो रहा है। इसकी वजह से वायरस में और अधिक बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में ही अब तक 25 बार डेल्टा वैरिएंट में म्यूटेशन हुआ है और उसके अलग-अलग मरीजों में पहचान हुई है। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक 90,115 सैंपल का जीनोम अनुक्रम पूरा हुआ है, जिनमें 62.9 फीसदी सैंपल में वायरस के गंभीर वैरिएंट मिले हैं। इनमें डेल्टा, अल्फा, गामा, बीटा, कप्पा इत्यादि वैरिएंट हैं, जो न सिर्फ दोबारा संक्रमण होने की आशंका को बढ़ा देते हैं, बल्कि वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमित कर सकते हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत में म्यू या फिर सी.1.2 नामक वैरिएंट का कोई मामला अब तक नहीं मिला है, लेकिन डेल्टा और डेल्टा से जुड़े अन्य म्यूटेशन लगातार हो रहे हैं, जिस कारण देश में महामारी की नई चिंताजनक स्थिति सामने आ सकती है। वर्तमान में डेल्टा-4 (एवाई.4) अधिकांश सैंपल में मिल रहा है। 

डेल्टा-1 से 25 तक  में चार सबसे तेज

सभी म्यूटेशन को डेल्टा-1 से लेकर डेल्टा-25 तक गणितीय पहचान दी गई है। इन 25 में से डेल्टा-4 नामक म्यूटेशन काफी तेज लग रहा है। महाराष्ट्र और केरल में अभी यही म्यूटेशन फैल रहा है। आशंका है कि कोरोना की आगामी लहर में डेल्टा में हो रहे इन म्यूटेशन की बड़ी और गंभीर भूमिका हो सकती है।

डब्ल्यूएचओ ने चिंताजनक श्रेणी में रखा

दिल्ली स्थित आईजीआईबी के अनुसार पिछले महीने महाराष्ट्र में 44 फीसदी मरीजों में डेल्टा-4 वैरिएंट मिला था। जबकि केरल में यह संख्या 30 फीसदी से भी अधिक है। वर्तमान में डेल्टा-4 वैरिएंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंताजनक श्रेणी में रखा हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के इन नए म्यूटेशन की वजह से महामारी की नई लहर में स्थिति कुछ भी पैदा हो सकती है।


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राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी 5.16 करोड़ खुराक मौजूद

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