Congress Kanhaiya Kumar Card: Will The Magic Work On The Youth? Can This Change The Get together’s Fortunes In Bihar? – कांग्रेस का कन्हैया कार्ड: क्या युवाओं पर चलेगा जादू, क्या इससे बिहार में बदल सकती है पार्टी की तकदीर?

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Printed by: प्रतिभा ज्योति
Up to date Wed, 22 Sep 2021 08:18 PM IST

सार

कन्हैया कुमार को अपने साथ लाकर क्या राहुल गांधी कांग्रेस को बदलने की तैयारी में है? क्या कांग्रेस का कन्हैया कार्ड युवाओं पर और बिहार में चलेगा? कहा जा रहा है कि कन्हैया कुमार का अतीत कांग्रेस में भी उनका पीछा नहीं छोड़ेगा।

कन्हैया कुमार और राहुल गांधी

कन्हैया कुमार और राहुल गांधी
– फोटो : पीटीआई

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विस्तार

भाकपा नेता कन्हैया कुमार  जल्द कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वे पहल 28 सितंबर को शामिल होने वाले थे लेकिन अब दो अक्तूबर को वे पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। कन्हैया कुमार के जरिए पार्टी युवाओं का दिल जीतने के साथ-साथ बिहार की राजनीति को भी साधने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के सामने कमजोर संगठन बड़ी चुनौती है और माना जा रहा है कन्हैया कुमार जैसे युवाओ को जोड़कर पार्टी अपने संगठन को धार दे सकती है। 

चुप हैं कुमार

कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की बारे में जब भाकपा महासचिव डी राजा से पूछा गया तो उन्होंने मीडिया से कहा कि ‘मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि वह इस महीने की शुरुआत में हमारी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मौजूद थे। कन्हैया कुमार के एक करीबी के मुताबिक  जेएनयू के पूर्व छात्र भाकपा में घुटन महसूस कर रहे थे और इसलिए उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की और कांग्रेस में उनके शामिल होने पर चर्चा हुई। राहुल गांधी के कार्यालय के एक सूत्र नेबताया, “वह एक अच्छे इंसान हैं। बहुत अच्छा होगा यदि वे पार्टी में आते हैं। ”

इस बारे में कन्हैया कुमार से संपर्क साधने की कई कोशिशें की गईं लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। कन्हैया कुमार लगातर इस मामले पर चुप हैं। हालांकि कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि वह बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के इच्छुक हैं और पार्टी में आने की तैयारी कर चुके हैं। 

कन्हैया कुमार का अतीत पीछा छोड़ेगा?

हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं की राय है कि कुमार अपने विवादास्पद अतीत और पिछले साल  पटना ऑफिस में अपने ही नेता कार्यालय सचिव इंदुभूषण वर्मा के साथ मारपीट के मामले को लेकर शुरूआत में कांग्रेस में भी संदेह के घेरे में रहेंगे। बिहार कांग्रेस से जुड़े एक पार्टी नेता ने कहा ‘झुकना कन्हैया कुमार को आता नहीं और अपने आक्रमक स्वभाव की वजह से कांग्रेस के लिए भविष्य में बोझ बन सकते हैं।‘

वहीं कांग्रेस में कुछ लोगों को कन्हैया कुमार को उन्हें पार्टी में लाने पर इसलिए ऐतराज है क्योंकि उन्हें 2016 में आतंकवादी अपराधी अफजल गुरु की फांसी के बाद कथित तौर पर “आजादी” के नारे लगाने और देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पार्टी के भीतर कुछ लोगों को डर है कि भाजपा के साथ राष्ट्रवादी टैग जुड़ा हुआ है, और कांग्रेस बैकफुट पर है। ऐसे में कन्हैया को शामिल करने से यह कहानी फिर से शुरू हो सकती है। 

बिहार में कांग्रेस को खड़ी कर सकते हैं

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी इस मामले में अलग राय रखती हैं। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर कन्हैया कुमार का नौजवानों का रुतबा है। मैं लोकसभा चुनाव में उनके संसदीय क्षेत्र में गई थी। वे बहुत अच्छा बोलते हैं और युवाओं पर उनका काफी प्रभाव है। वे अभी जिस पार्टी में वो छोटी है, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिला। बड़ी पार्टी में आएंगे तो उनको ज्यादा अवसर मिलेगा। यदि कांग्रेस उन्हें काम करने की आजादी दें तो वे बिहार में पार्टी खड़ी कर सकते हैं। हां लेकिन कांग्रेस को यह देखना होगा कि वे कन्हैया कुमार के खिलाफ खड़े होने वाले विरोधों को कैसे दबाती हैं क्योंकि जैसे ही वे पार्टी में आएंगे उनके अतीत को लेकर तरह-तरह की आवाजें उठेंगी। 

युवाओं में लोकप्रिय है कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय के हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई और सीपीआई के टिकट पर गिरिराज सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए। वाकपटु और भाषणकला में माहिर कन्हैया कुमार युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। उन्हें देश भर के छात्रों का बड़ा समर्थन हासिल है।

बिहार में कांग्रेस को क्या फायदा  

बिहार चुनाव में हर पार्टी को जातीय समीकरण का ध्यान रखना होता है। कन्हैया कुमार भूमिहार हैं और बेगूसराय में भूमिहार मतदाताओं की अच्छी संख्या है। कांग्रेस बिहार में नए चेहरे की तलाश में है, इसलिए पार्टी को लगता है कि इस  भूमिहार चेहरे के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में उतरा जा सकता है। इसके अलावा 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा में भी कन्हैया कुमार पार्टी के लिए एक चेहरा हो सकते हैं। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजद और भाकपा (माले) की तुलना में खराब प्रदर्शन किया था। कांग्रेस 70 में से केवल 19 सीटों पर ही जीत सकी थी। राजद ने जिन 144 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से आधे से ज्यादा पर जीत हासिल की। जबकि सीपीआई (एमएल) ने 19 में अपने उम्मीदवार उतारे और 12 सीटों पर जीत हासिल की। 

बिहार की राजनीति को समझने वाले एक विश्लेषक ने बताया  कांग्रेस को बिहार में एक युवा, गतिशील नेता की आवश्यकता है, और कुमार भी बिहार से आते हैं। पिछले कुछ सालों से पार्टी की राजनीतिक किस्मत एक बक्से में बंद है, बक्से को खोलने में कन्हैया कुमार मामूली बदलाव ला सकते हैं क्योंकि वे  एक विनम्र पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं और युवाओं को प्रभावित करते हैं। अच्छी बात है कि उनके साथ वंशवादी टैग नहीं है।

कांग्रेस ने कई युवा नेताओं को खोया

कांग्रेस, ने पिछले सालों में ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुष्मिता देव, जितिन प्रसाद और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे कई योग्य युवा नेताओं को खो दिया है। पार्टी में कुमार के प्रवेश को पार्टी एक लाभ के रूप में देख रही है। इससे दूसरे युवा नेताओं की भी कांग्रेस में आने की राह आसान होगी। कांग्रेस को युवा, साहसी और आक्रामक चेहरों की सख्त जरूरत है, खासकर आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय संगठनों को देखते हुए साथ, जो अपनी विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

कन्हैया कुमार जैसे कई युवाओं को पार्टी में जोड़ने के लिए पार्टी हर राज्य में महाअभियान चलाने की भी तैयारी कर रही है। इसी क्रम में गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी के भी पार्टी में जुड़ने की संभावना है। जिग्नेश गुजरात में भाजपा के खिलाफ लड़ने वाले प्रमुख चेहरों में एक हैं। 

 

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