Coal Scarcity In India Inflicting Electrical energy Disaster Union Minister Pralhad Joshi Says Some States Are Accountable – Coal Disaster: पीएमओ ने की कोयला आपूर्ति की समीक्षा, मंत्री ने राज्यों को ठहराया जिम्मेदार

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सार

कोयले की कमी से देश में बिजली संकट पैदा हो गया है। कई राज्यों में बिजली संयंत्र बंद होने की कगार पर हैं। वहीं, कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को रिकॉर्ड कोयला आपूर्ति करने की बात कही और मौजूदा संकट का दोष राज्यों पर मढ़ा। दूसरी ओर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्यों की मदद करना केंद्र की जिम्मेदारी है। 

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अभी तक देश में कोयले की कोई कमी होने का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने मंगलवार को यू-टर्न लेते हुए मौजूदा संकट के पीछे कुछ राज्यों को जिम्मेदार ठहराया। केंद्रीय कोयला मंत्री ने कहा कि हमने राज्यों से पहले ही कहा था कि कोयले का स्टॉक बढ़ा लें लेकिन तब हमारी नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने तो आपूर्ति बंद कर देने के लिए भी कहा था। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को कोयला आपूर्ति और बिजली उत्पादन की स्थिति की समीक्षा की।

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि हमने कल (सोमवार को) 19.40 लाख टन कोयले की आपूर्ति की, यह घरेलू कोयले की अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति है। जहां तक राज्यों का संबंध है, इस साल जून तक हमने उनसे कोयले का स्टॉक बढ़ाने का अनुरोध किया था, तो कुछ ये तक कहने लगे थे कि ‘कृपया एक उपकार करें, अब कोयला न भेजें’।

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार जोशी ने कहा कि बारिश के कारण कोयले की कमी हुई थी, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमतें 60 रुपये प्रति टन से बढ़ कर 190 रुपये पर पहुंच गईं। उन्होंने कहा, इसी के चलते आयातित कोल पावर प्लांट या तो 15-20 दिन के लिए बंद हो गए या बहुत कम उत्पादन कर रहे हैं। इससे घरेलू कोयले पर दबाव बढ़ा है।

जोशी ने कहा कि हमने अपनी आपूर्ति जारी रखी है, यहां तक कि पिछले बकाये के बावजूद हमने इसे जारी रखा है। हम राज्यों से कोयले का स्टॉक बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं… कोयले की कमी नहीं होगी।

राज्यों की मदद करना केंद्र की जिम्मेदारी: गहलोत
वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोक ने इस संकट को लेकर कहा कि यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राज्यों की मदद करे। यह अच्छी तरह से पता था कि कोयले की कमी है और राज्य समस्या में हैं। 

महाराष्ट्र: ‘कोयले की कमी से नहीं होगी लेड शेडिंग’
दूसरी ओर महाराष्ट्र के बिजली मंत्री नितिन राउत ने कहा कि कोयला संकट के बावजूद हमने हमारे नागरिकों तक बिजली आपूर्ति पहुंचाने की कोशिश की है। राज्य में कोयले की कमी के बाद भी इस समय राज्य में 27 बिजली उत्पादन इकाइयों में से केवल चार बंद हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘एक मंत्री के रूप में, मैं गारंटी दे सकता हूं कि कोयला संकट के कारण कोई लोड शेडिंग नहीं होगी।’

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को कोयला आपूर्ति और बिजली उत्पादन की स्थिति की समीक्षा की। सरकार देश के कई राज्यों में चल रहे बिजली संकट को खत्म करने का रास्ता तलाश रही है। पावर प्लांट में कोयले की कमी को लेकर हुई बैठक में बिजली सचिव आलोक कुमार और कोयला सचिव एके जैन ने इनकी उपलब्धता को लेकर विस्तार से जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कोयले के परिवहन को बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श हुआ। कोयला मंत्रालय से आपूर्ति बढ़ाने के लिए कहा गया है जबकि रेलवे से कहा गया है कि पावर प्लांट तक ईंधन पहुंचाने के लिए रेक की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि देश में कोयले की कमी के लिए केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेदार है, जिसके चलते कई पावर प्लांट में ईंधन की आपूर्ति बाधित हो गई है। पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि कई पावर प्लांट कोयले की कमी के चलते बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक कोयला नीति लेकर आए थे जो देश की भविष्य में बिजली की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाई गई थी। लेकिन तब विपक्ष में मौजूद भाजपा ने कोयला घोटाले का आरोप लगाया था और नीति को वापस लेना पड़ा था। उन्होंने कहा कि कोयले की उपलब्धता के बावजूद इसका खनन नहीं किया जा रहा है।

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अभी तक देश में कोयले की कोई कमी होने का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने मंगलवार को यू-टर्न लेते हुए मौजूदा संकट के पीछे कुछ राज्यों को जिम्मेदार ठहराया। केंद्रीय कोयला मंत्री ने कहा कि हमने राज्यों से पहले ही कहा था कि कोयले का स्टॉक बढ़ा लें लेकिन तब हमारी नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने तो आपूर्ति बंद कर देने के लिए भी कहा था। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को कोयला आपूर्ति और बिजली उत्पादन की स्थिति की समीक्षा की।

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि हमने कल (सोमवार को) 19.40 लाख टन कोयले की आपूर्ति की, यह घरेलू कोयले की अब तक की सबसे अधिक आपूर्ति है। जहां तक राज्यों का संबंध है, इस साल जून तक हमने उनसे कोयले का स्टॉक बढ़ाने का अनुरोध किया था, तो कुछ ये तक कहने लगे थे कि ‘कृपया एक उपकार करें, अब कोयला न भेजें’।

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार जोशी ने कहा कि बारिश के कारण कोयले की कमी हुई थी, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमतें 60 रुपये प्रति टन से बढ़ कर 190 रुपये पर पहुंच गईं। उन्होंने कहा, इसी के चलते आयातित कोल पावर प्लांट या तो 15-20 दिन के लिए बंद हो गए या बहुत कम उत्पादन कर रहे हैं। इससे घरेलू कोयले पर दबाव बढ़ा है।

जोशी ने कहा कि हमने अपनी आपूर्ति जारी रखी है, यहां तक कि पिछले बकाये के बावजूद हमने इसे जारी रखा है। हम राज्यों से कोयले का स्टॉक बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं… कोयले की कमी नहीं होगी।

राज्यों की मदद करना केंद्र की जिम्मेदारी: गहलोत

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोक ने इस संकट को लेकर कहा कि यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राज्यों की मदद करे। यह अच्छी तरह से पता था कि कोयले की कमी है और राज्य समस्या में हैं। 

महाराष्ट्र: ‘कोयले की कमी से नहीं होगी लेड शेडिंग’

दूसरी ओर महाराष्ट्र के बिजली मंत्री नितिन राउत ने कहा कि कोयला संकट के बावजूद हमने हमारे नागरिकों तक बिजली आपूर्ति पहुंचाने की कोशिश की है। राज्य में कोयले की कमी के बाद भी इस समय राज्य में 27 बिजली उत्पादन इकाइयों में से केवल चार बंद हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘एक मंत्री के रूप में, मैं गारंटी दे सकता हूं कि कोयला संकट के कारण कोई लोड शेडिंग नहीं होगी।’


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पीएमओ ने की कोयला आपूर्ति और बिजली उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा

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