Centre Tells Supreme Court docket It Does Not Want To File Detailed Affidavit On Pleas Looking for Impartial Probe Into Alleged Pegasus Snooping Row – जासूसी कांड: पेगासस पर हलफनामा दाखिल नहीं करेगा केंद्र, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब आदेश ही विकल्प

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Revealed by: संजीव कुमार झा
Up to date Mon, 13 Sep 2021 12:45 PM IST

सार

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि वह इस मामले पर हलफनामा दाखिल नहीं करने जा रही है। सरकार ने कहा कि यह यह पब्लिक डोमेन का मामला नहीं है इसलिए हलफनामा दाखिल करना सही नहीं होगा।  

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पेगासस जासूसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि वह इस मामले में हलफनामा दाखिल नहीं करने जा रही है। सरकार ने कहा कि यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है। इसलिए हलफनामा दाखिल नहीं कर सकते। लेकिन वह जासूसी के आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित करने के लिए राजी है।

वहीं सरकार के इस जवाब से मुख्य न्यायाधीश रमन्ना संतुष्ट नहीं दिखे और नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हमें जानना है कि क्या कोई भी स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर सकता है? क्या इसका इस्तेमाल सरकार ने किया? क्या यह कानूनी तरीके से हुआ? सरकार अगर हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती तो हमें आदेश पारित करना पड़ेगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को दिया जवाब
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुरक्षा और सैन्य एजेंसियों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों की जांच के लिए कई तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार अगर इसे सार्वजनिक करती है तो आतंकवादी या राष्ट्रविरोधी ताकतें इसका गलत इस्तेमाल करेंगे। आशंका है कि आतंकी इसे मॉडिफाई कर ट्रैकिंग से बच जाएंगे। मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार, निगरानी के बारे में सभी तथ्यों को एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति के समक्ष रखने के लिए तैयार है, जो अदालत को एक रिपोर्ट दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने पेगासस मुद्दे पर केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप बार-बार उसी बात पर वापस जा रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि सरकार अब तक क्या कर रही थी। हम राष्ट्रीय हित के मुद्दों की ओर नहीं जा रहे। हमारी सीमित चिंता लोगों के बारे में है। समिति की नियुक्ति कोई मुद्दा नहीं है। हलफनामे का उद्देश्य है कि हमें पता चले कि आप कर क्या रहे हैं।   

विस्तार

पेगासस जासूसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि वह इस मामले में हलफनामा दाखिल नहीं करने जा रही है। सरकार ने कहा कि यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है। इसलिए हलफनामा दाखिल नहीं कर सकते। लेकिन वह जासूसी के आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित करने के लिए राजी है।

वहीं सरकार के इस जवाब से मुख्य न्यायाधीश रमन्ना संतुष्ट नहीं दिखे और नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हमें जानना है कि क्या कोई भी स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर सकता है? क्या इसका इस्तेमाल सरकार ने किया? क्या यह कानूनी तरीके से हुआ? सरकार अगर हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती तो हमें आदेश पारित करना पड़ेगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को दिया जवाब

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुरक्षा और सैन्य एजेंसियों द्वारा आतंकवादी गतिविधियों की जांच के लिए कई तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार अगर इसे सार्वजनिक करती है तो आतंकवादी या राष्ट्रविरोधी ताकतें इसका गलत इस्तेमाल करेंगे। आशंका है कि आतंकी इसे मॉडिफाई कर ट्रैकिंग से बच जाएंगे। मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार, निगरानी के बारे में सभी तथ्यों को एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति के समक्ष रखने के लिए तैयार है, जो अदालत को एक रिपोर्ट दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने पेगासस मुद्दे पर केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप बार-बार उसी बात पर वापस जा रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि सरकार अब तक क्या कर रही थी। हम राष्ट्रीय हित के मुद्दों की ओर नहीं जा रहे। हमारी सीमित चिंता लोगों के बारे में है। समिति की नियुक्ति कोई मुद्दा नहीं है। हलफनामे का उद्देश्य है कि हमें पता चले कि आप कर क्या रहे हैं।   



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